ज़िंदगी

ज़िंदगी जब भी ठहरी लगती है
अंधी ,गूंगी और बहरी लगती है

राजेश”अरमान”


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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. Panna - June 25, 2016, 4:48 pm

    behatreen

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