अंग

मुझसे मेरा ही एक अभिन्न अंग छीन लिया गया,
मानो दिल से धड़कन का ही संग छीन लिया गया,

हाथ मलता ही रहा देखकर कुछ कर न सका मैं,
बेगुनाह मेरी आँखों से उनका हर रंग छीन लिया गया।।

अंजाना राही

Comments

3 responses to “अंग”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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