अधूरी सी जिंदगी का अधूरा फ़साना हूँ मैं।

अधूरी सी जिंदगी का अधूरा फ़साना हूँ मैं।
नई सी दुनिया में शख़्स कोई पुराना हूँ मैं।।
,
चल रही है सरहदों पे जंग न जाने कब से।
पता नहीं की किस गोली का निशाना हूँ मैं।।
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मैंने भी देखी थी कई सदियां जिन्दा रहते।
आज क़ब्र में सोया इक शहर वीराना हूँ मैं।।
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हमकों याद करके कभी गमज़दा न होना।
इस मिटटी में दफ़्न हुआ तो खजाना हूँ मैं।।
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मुझको मेरी क़ीमत ख़ुद भी मालूम नहीं है।
वो इस्तेमाल करके छोड़ा गया पैमाना हूँ मैं।।
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हमकों यूँ अलग किया जायेगा मालूम न था।
जैसे नए घरों में पड़ा बर्तन कोई पुराना हूँ मैं।।
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अब तो मदद करती है आँधियाँ भी आ कर।
कभी जुड़ ही नहीं पाया वो आशियाना हूँ मैं।।
@@@@RK@@@@

Comments

7 responses to “अधूरी सी जिंदगी का अधूरा फ़साना हूँ मैं।”

  1. Panna Avatar

    Bahut khoob Ramesh ji

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

  2. Ria Avatar
    Ria

    बहुत खूब

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

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