अपने मन को कभी न डगमगाना

अपने मन को
कभी न डगमगाना
भले ही त्याग दे,
तुझको ये स्वारथ का जमाना,
अपने मन को
कभी न डगमगाना।
भले ही लाख परेशानियां
आएं तुझ पर।
मगर तू लौह सा बन हौसला रखे रखना।
अपने कदमों को बढ़ाते रहना,
किसी से झूठी आस मत रखना,
खुद की मेहनत में भरोसा रखना,
गन्दी बातों से किनारा रखना,
सच का सच में तू सहारा रखना,
जीतना मंजिलों को
जीतकर फिर खिलखिलाना,
अपने मन को
कभी न डगमगाना।

Comments

6 responses to “अपने मन को कभी न डगमगाना”

  1. वाह वाह very very nice

  2. वाह बहुत ही जबरदस्त लिखा सर आपने

  3. Geeta kumari

    कवि सतीश जी ने निज मेहनत के बलबूते पर अपनी मंज़िल पाने और
    उस जीत की खुशी को प्राप्त कर सच्ची ख़ुशी मिलने की भी सुंदर बात कहीं है । सुन्दर लय बद्ध शैली और बेहतर शिल्प के साथ बेहद शानदार प्रस्तुति..

  4. अति सुंदर

  5. कमाल का लेखन, जयकार हो

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