One Comment

  1. यह ग़ज़ल रूमानियत, सूफियाना अंदाज और इश्क़ की पीड़ा से भरपूर एक उम्दा नमूना है। शायर ‘नदीम’ ने लफ्जों के साथ जो खेल खेला है, वह क़ाबिल-ए-दाद है। यह ग़ज़ल पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती है और दिल पर एक गहरा असर छोड़ती है। बहुत बढ़िया कलाम है।

Leave a Reply