मित्र अपना यह अभिवादन ,
बहुत मन को सुहाता है ।
आँख जैसे ही खुलती है ,
तुम्हारा ध्यान आता है ।
मै ईश्वर से भी पहले ,बस
तुझे ही याद करता हूँ ,
तू जीवन के अँधेरों में ,
मुझे रस्ता दिखाता है ।
****जानकीप्रसाद विवश **
अभिवादन
Comments
2 responses to “अभिवादन”
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मित्र अपना यह अभिवादन ,
बहुत मन को सुहाता है ।
अतिसुन्दर -
Good
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