अल्फाज कहां से लाऊं?

दिल में छिपे जो जज्बात है उनके लिए अल्फाज लाऊं कहां से?

खुरेडे जा रहे जो मेरे दिल को अंदर ही अंदर उन्हें बयान करने के लिए अल्फाज लाऊं कहां से?

ज़िक्र करे भी तो किस्से करे
जो सुनते उनके पास वक्त नहीं और हर किसी से बता सकुन ऐसे अल्फाज लाऊं कहां से?

ये चुप सा लेहजा हमेशा से नहीं था हमारा,
पर तुम्हें हर बात दिल खोल के बताने के लिए अल्फाज लाऊं कहां से?

बीती बातें एक बार दिल खोल के बोलनी है लेकिन उनके लिए भी अल्फाज कहां से लाऊं?

कि ख्यालो में कह चुके है सब तुमसे लेकिन सामने से कहे ऐसे अल्फाज कहां से लाऊं?

Comments

One response to “अल्फाज कहां से लाऊं?”

  1. Ritika Sharma

    प्रस्तुत की गई शेरों और पंक्तियों की प्रभावशाली एवं व्यापक अवधारणाओं के साथ आपने अपनी भावनाओं को शानदार ढंग से व्यक्त किया है। इन रचनाओं में एक मधुर संगीत है, जो आपके अंतर्मन के आपात और गहरे भावों को व्यक्त करने का एक अद्वितीय तरीका है। ध्यान देने वाली अपार संवेदनशीलता और विचारशीलता से भरी हुई ये शेरों की पंक्तियाँ, मनोहारी हैं और रीती के साथ आपके विचारों को साझा करने का एक अच्छा तरीका हैं।

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