अहिंसा के पुजारी, सत्य, प्रेम , करूणा
जैसे मानवीय गुणों की हमें दरकार है ।
किसानों के हिमायती की दृढ़ता को
अपनाने हेतु क्या हम पुनः तैयार हैं ।
अपनी मानवीय संवेदना को
रखना हमें बरकरार है ।
उत्पीङको के प्रति दया
रखने वालों से टकरार है ।
अहिंसा के पुजारी हम
Comments
10 responses to “अहिंसा के पुजारी हम”
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बहुत खूब
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सादर आभार
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अहिंसा के पुजारी, सत्य, प्रेम , करूणा
जैसे मानवीय गुणों की हमें दरकार है ।
वाह बहुत खूब, उच्च मानवीय गुणों की महत्ता को प्रतिपादित किया है आपने।-

सादर आभार
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बापू गांधी जी और शास्त्री जी के नारे को आत्मसात करने की प्रेरणा देती हुई बहुत सुंदर प्रस्तुति ।
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सादर आभार
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चरैवेति चरैवेति सुमन जी
हर अवसर पर आपकी लेखनी आपकी प्रतिभा का नया रंग प्रस्तुत करता है।-

सादर धन्यवाद
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बहुत खूब
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सादर आभार
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