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आंसू

मिले हैं विरासत में आंसू मुझे
पता न चला कि दोस्त कैसे बने
उनका सैलाब है आशियां मेरा
हंसी से नाता न मेरा रहा।
जब पहुंचे मंज़िल से आगे कभी
रहे याद दोस्ती सहारा बनी
संभाला है उन्होंने गिरने से मुझे
पता न चला कि दोस्त कैसे बने
शिकायत मुझको कहां कब रही
जैसी चली वैसी बढ़ती रही
पलकों के साए में छिपाती रही
सपनों को अपनों से बचाती रही
आंसू कभी आंसू न रहे
पता न चला कि दोस्त कैसे बने।।।

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