मिले हैं विरासत में आंसू मुझे
पता न चला कि दोस्त कैसे बने
उनका सैलाब है आशियां मेरा
हंसी से नाता न मेरा रहा।
जब पहुंचे मंज़िल से आगे कभी
रहे याद दोस्ती सहारा बनी
संभाला है उन्होंने गिरने से मुझे
पता न चला कि दोस्त कैसे बने
शिकायत मुझको कहां कब रही
जैसी चली वैसी बढ़ती रही
पलकों के साए में छिपाती रही
सपनों को अपनों से बचाती रही
आंसू कभी आंसू न रहे
पता न चला कि दोस्त कैसे बने।।।
आंसू
Comments
9 responses to “आंसू”
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Bahut achey
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Thanks
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Nice
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Thankyou
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Nice
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Thanks
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वेलकम
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Good
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Thanks
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