आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई।
तुझे से ही उम्मीद थी —-
और तु ही हमको छोड़ गयी।
एक आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई।
मंजिल पर पहुँचना दुर की बात थी।
पहले ही मोड़ पर वो हमको छोड़ गयी।
प्यार मे मजबुरियाँ किसको ना होता ।
ये मजबुरिया के नाम पर तु मुझे छोड़ गई।।
हम तो नाहक मे अपनी किस्मत अजमाते रहे,
तु तो मेरे अपने खास के साथ ऩाता जोड़ गयी।।
दुर जा रहा हूँ तेरे सहर से मै क्योकि ये हवा भी हमसे नाता तोड़ गयी।
क्या नही कुछ मेरे पास तु तो हिसाब रखी केवल मेरे औकादो का।।
ज्योति
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