आखिर खुश तोह हो ना तुम

आखिर खुश तोह हो ना तुम
कभी यह ही मायने रखा करती थी

किताबों के बीच वोह सुखी गुलाब
आज भी बहुत कुछ कहती है

किस्मत ने खिंची कैसी यह डोर
मै यहा और तुम कहा हो गए

अपनो मे तुम्हारा शुमार होता था
पर अब तुम कब पराए हो गए पता ना चला

Comments

9 responses to “आखिर खुश तोह हो ना तुम”

  1. Antima Goyal Avatar

    क्या बात है

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

    1. Antariksha Saha Avatar
      Antariksha Saha

      Thanks

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