कभी आना था यहाँ तुम्हारा अब विराना सा हो गया है जहाँ राह तकते थे तुम्हारे वहा बेगाना सा लगने लगा है जिसके पीछे भागते हो हासिल वो हो गया है जो खो दिया तुमने […]

उस तक बात नहीं पहुँचती आजकल ब्लॉक है सब जगह बात हुए अरसा हो गया कभी कभी देखता हु सपनो मे वही मेरा औकात है ऐसा उसने कहा था कुछ लोग साथ होते है कुछ […]

सोचता था तूने मुझे छोड़ दिया पर पीछे मुड़ा तो साया तेरा ही था हम टूटे थे उस वक्त जरूर पर खुद्दारी से लड़कर सफल होंगे ज़रूर जज़्बा है शोर नहीं काली रात है पर […]

जब तक तारों मे नहीं मै हू यही बस तेरी आस ही है जिनकी चिंगारी जिंदा रखे हुए है रेत मे पैरों के निशान जो खो जाती है वैसा मेरा प्यार नहीं पत्थर पर कुरेदे […]

जीने के लिए लड़ना पड़ता है साहब भूख से रोटी पाने से अपने नीची जाती का होने से अपना तोह जन्म से ही तुम्हे जात नजर आता है तुमसे ज्यादा मेहनत करते है पर कोई […]

दिल टूटा है मगर याद धुंधला नहीं अगर तो क्या करे लोग छोर ऐ है मगर हम अकेले है अगर तो क्या करे खुदा तेरी नयमत देख लोग भूले ना भूले पल बीते ,जिए ना […]

सोचो कभी तुमसे मुलाकात हुई तो आमने सामने तुम और मै इतने अभिमान कितने शर्म सोचो कभी तुमसे मुलाकात हुई तो और तुम किसी और के हम उस पुराने वकत के गुलाम बने हुए है […]

बारिश की यह बूंदे बस गिरे जा रही हैं दिल के आग को सीए जा रही हैं रो हम रहे हैं यहां पढ़ सभी अनजान हैं बारिश मै आंसू खो जा रहे हैं सब बोलते […]

सर्द इस मौसम मे बस जिए जा रहे हैं दामन मे बस सफा है इसी का घुमान किया तो तुम घमंड समझ लिए तू पाक हैं तू परवर्दिकार है बस यह इल्तिज़ा है की मेरे […]

बारिश के बूंदों से याद आती हैं वोह सौंधी सी खुश्बू जो मन को भाती थी वोह गली वोह नुक्कड़ जिनमे ख्वाब देखा था जेब छोटी ही सही पढ़ दिल बड़े हुआ करते थे कीचड़ […]

तुमने कहा की मुसलमान गलत है हमने मान लिया तुमने कहा लॉकडाउन मे घर वापसी कर रहे मज़दूर गलत है कोरोना संक्रमण का कारण है हमने मान लिया तुमने कहा किसान आतंकवादी है ख़ालिस्तानी हमने […]

जो हल जोते, फसल उगाए उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। जो मजदुर उत्पाद बनाए उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। भूख और लाचारी का ऐसा आलम है अब जान सस्ती है रोटी नहीं। जात और धर्म […]

बात एक शायर की करता हू जिसे अपनों ने ठुकराया वफ़ा की साजिस देखो बेवफाए मोहब्बत ने ज़िन्दगी की सबसे बड़े सच से वाकिफ बनाया की यह चलती जाती है सुर्ख हवाएं बस ये एलान […]

सोचता था हक़ से मांग सकता हू तुझसे कुछ भी देखा तोह वोह हक़ तूने कब किसी और को दे दिया जिस नाम को तबीर बना के घूमते थे वोह हर किसी के साथ जुड़ […]

थक चुका हू माँ मुझे सोने दे इस झूठे दुनिया से पक चुका हू मुझे अपने साथ ले ले स्वार्थ से चलते लोग मुखौटे पहने लोग सरल पेड़ कटते जाते है सरलता और मूर्खता मे […]

वो पुरानी गिटार पुरानी बाइक वो गली वो नुक्कर वो चौबारे वो बेहतर ज़िन्दगी बनाने के सपने कोई छीन नहीं सकता वोह जज़्बा आगे आने का वो खुली आँखों के सपने वो रात के तारे […]

सतत संग्राम ज़िन्दगी का अंग बन गए है मज़दूर हू मजबूर नहीं लॉकडाउन का बहाना दे के तुमने मेरी नौकरी छीनी भूखे हम है तोह भोजन छिना भी जा सकता है किसान हू मेरे उत्पाद […]

मेरे ख्वाब ही शायद ठीक है और ना जगा खुदगर्ज़ इस दुनिया की फिदरत देखो सोचा कभी बदलेंगे दुनिया पर हर घड़ी यह बदलता है अपनों से दूर किए जाता है।

इबादत है तू मेरे सांसों में समाई खो ना जाना रूठ ना जाना सह ना पाऊँगा ज़िन्दगी में जिस चीज़ को चाहा है वो दूर हो जाती है कमी शायद मुझमें ही है पता नहीं […]

कभी अकेला महसूस हो तोह शायरों की बसती जाओ जनाब किसी का प्यार पूरा नहीं पर बात वह मोह्बत की करते है जिनके प्यार को समाज ने ना अपनाया बात वह दिलों को जोड़ने की […]

अजीब है यह दुनिया जिनोंहने बात बैर की की, लोगों को बाटने की की बात वह राम राज्य की करते है जिनके बिरियानी खा कर हम लखनऊ की नवाबी ठाठ के गुण गाते है बात […]

रोज़ 9 बजे से 5 की ड्यूटी फिर ओवरटाइम बचता इतना सा समय जब लिखता हूँ फिर आया लॉक डाउन जब घर मे बंद काम बंद सब बंद भूख से बदहाल ज़िन्दगी सपने जो थे […]

जन्नत क्या है तोज़क क्या है क्या पता रब्बा तेरे साथ ने दोनों से ही वाकिफ किया किस्मत का क्या खेल है मिलना था हमने कभी देखो आज भी हम जुदा है साथ होते हुए […]

मालिक मेरे ततू मुझे शरण दे बहुत थक चुका हू मै अब ना ढोया जाए ये बैरी दुनिया लब पर आए ना कोई नाम बस तू ही तू है हर शाम लोग मीठे बस स्वार्थ […]

तुम और हम एक ना हो पाए इसका कोई मलाल नहीं चलो एक तजुर्बा तोह हुआ जिंदगी साथ नहीं ना सही यादों का पिटारा तोह हुआ ना तुम गलत थे ना मै सही वक़्त गलत […]

जो मिला नहीं वह कभी तेरे लिए बना नहीं उसी की चाहत मे क्यों जिए जाता है जो तेरे पास है उसी मे खुश रहना सीख इसी का नाम मिडिल क्लास है

तेरे तस्वीर को देखे अरसा हो गया इस तपते रेगिस्तान मे पानी गिरने पर भी तरसा रह गया तेरे बिना बारिश की बूदे बेगाना सा लागे है ठंडी परी शाम मे कम्बल की गर्माहट सी […]

ज़िन्दगी के कुछ पल बदलना चाहता हू काश रोक लिया होता तुम्हे तोह हालत कुछ और होते मुहब्बत तुम्हारे सपनो के आगे बहुत छोटी थी इसलिए तुम्हे जाने दिया तुम्हे मुझे गलत समझने का कारण […]

इस बार की दुर्गा पूजा फीकी सी होंगी ना भव्य पंडाल होंगे ना भीड़ ना खाने के स्टाल्स होंगे ना पुलिस की बार्रिकडिंग इस बार की दशहरा फीकी सी होंगी रावण तोह बनेंगे पर भीड़ […]

खामोश हम भी थे तुम भी थे और यह ख़ामोशी रिश्ते को खत्म कर गई दोनों एक दूसरे के लिए तड़पते रहे पर यह ख़ामोशी दोनों को रास आ गई सारे वजूहात छोटे थे पर […]

यह शहर अनजान सा लगने लगा है तू नहीं तोह बेगाना सा लगने लगा है वह चाय की टपरी वह गालिया आज भी भरे है तू नहीं तोह सब कुछ बेजान सा लगने लगा है […]

ख़्वाबों का क्या है आ ही जाते हो तुम बेशक़ रातों को जगा जाते हो तुम वह प्यार ही क्या जिसमे तड़प ना हो वह आग ही क्या जिसमे तपन ना हो अब तोह आग […]

ढूंढता हु आज भी सुकून के कुछ पल बचपन की यादों को टटोल के देखा तोह जी चूका हु वह पल मानता हु पैसे नहीं थे उतने पर मज़ा तोह खूब किया दादी माँ के […]

ए वतन ए वतन तेरी सरफ़रोशी मे खो जाए मेरा तन बदन ए वतन ए वतन तेरी परस्तिश मे जी जाऊ मै सारा जीवन वैसे तोह वासुदेव कुटुम्बकम का देश है पर सोच जो दुश्मन […]

इल्म भी नहीं हुआ तेरे जाने का आज भी कही बसती हो मेरे दिल मे इन बारिस की शामों मे अक्सर याद आती हो हा तेरा घरौंदा छोड़ उड़ गई पर देखो आज भी संभाल […]

तुम जो पूछते हो और सब ठीक ठाक अपनी तकलीफे गिनाऊ तोह क्या सच मे सुनोगे नहीं ना, तोह क्यों पूछते हो