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आज की नारी

आज की नारी,
सीमित नहीं है
घर की चार दिवारी तक।
तन से कोमल मन से सशक्त
है नारी …
निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी।
शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो,
या हो फिर विज्ञान।
आज की नारी ने,
बनाया हर क्षेत्र में स्थान।
हर कला में पारंगत है,
पाती है समाज में सम्मान।
घर भी संभालती है,
काम पर भी जाना है
दोनों ही स्थानों पर,
उसका ठिकाना है।
आज हर क्षेत्र में,
नारी का बोलबाला है।
करती है सारे काम फिर भी मुस्कुराए,
बस थोड़ा सा प्यार
और थोड़ा सा सम्मान ही तो चाहे।।
_____✍️गीता

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