आज की नारी

आज की नारी,
सीमित नहीं है
घर की चार दिवारी तक।
तन से कोमल मन से सशक्त
है नारी …
निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी।
शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो,
या हो फिर विज्ञान।
आज की नारी ने,
बनाया हर क्षेत्र में स्थान।
हर कला में पारंगत है,
पाती है समाज में सम्मान।
घर भी संभालती है,
काम पर भी जाना है
दोनों ही स्थानों पर,
उसका ठिकाना है।
आज हर क्षेत्र में,
नारी का बोलबाला है।
करती है सारे काम फिर भी मुस्कुराए,
बस थोड़ा सा प्यार
और थोड़ा सा सम्मान ही तो चाहे।।
_____✍️गीता

Comments

5 responses to “आज की नारी”

  1. Satish Pandey

    करती है सारे काम फिर भी मुस्कुराए,
    बस थोड़ा सा प्यार
    और थोड़ा सा सम्मान ही तो चाहे।।
    ——— बहुत सुंदर पंक्तियाँ, बहुत उच्चस्तरीय कविता। कवि गीता जी ने जीवनदायिनी नारी पर बहुत खूबसूरत रचना की है।

    1. Geeta kumari

      कविता की इतनी सुन्दर सराहना और लाजवाब समीक्षा हेतु बहुत धन्यवाद सतीश जी, उत्साह वर्धन हेतु हार्दिक आभार सर

    1. शुक्रिया भाई जी

  2. आज की नारी,
    सीमित नहीं है
    घर की चार दिवारी तक।
    तन से कोमल मन से सशक्त
    है नारी …
    निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी।

    सच ही तो है आज की नारी हर क्षेत्र में आगे है

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