5 Comments

  1. करती है सारे काम फिर भी मुस्कुराए,
    बस थोड़ा सा प्यार
    और थोड़ा सा सम्मान ही तो चाहे।।
    ——— बहुत सुंदर पंक्तियाँ, बहुत उच्चस्तरीय कविता। कवि गीता जी ने जीवनदायिनी नारी पर बहुत खूबसूरत रचना की है।

    1. कविता की इतनी सुन्दर सराहना और लाजवाब समीक्षा हेतु बहुत धन्यवाद सतीश जी, उत्साह वर्धन हेतु हार्दिक आभार सर

  2. आज की नारी,
    सीमित नहीं है
    घर की चार दिवारी तक।
    तन से कोमल मन से सशक्त
    है नारी …
    निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी।

    सच ही तो है आज की नारी हर क्षेत्र में आगे है

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