आपकी ख़ामोशियाँ

आप कुछ कहें न कहें,
सब कुछ कह जाती हैं,
आपकी ख़ामोशियाँ।
ख़ुशियों का इज़हार भी करती और
बता देती हैं आपकी परेशानियाँ ।
आप कितना भी छुपा लो,
ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा लो,
आपकी सुनती ही नहीं हैं..
चुगली कर जाती हैं हमसे,
आपकी खामोशियाँ॥
____✍गीता

Comments

One response to “आपकी ख़ामोशियाँ”

  1. Rohit

    Bahut sundar

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