आपकी चंचल चुनरिया

आपकी चंचल चुनरिया को
मैं भिगो दूँगा,
मेघ का एक छोटा टुकड़ा बन
सावन में झड़ी लगा दूँगा।
बिछाने हर तरफ
खुशी की हरियाली,
अपने जीवन की
हर एक घड़ी लगा दूँगा।

Comments

4 responses to “आपकी चंचल चुनरिया”

  1. वाह वाह, कमाल की पंक्तियाँ

  2. रुमानियत से भरी कवि सतीश जी की बहुत सुरम्य रचना, लाजवाब लेखन

  3. शानदार प्रस्तुति

  4. Amita

    बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति सर🙏🙏

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