ये झुकी हई आंखों से मानो सुनहरी शाम सी लगती हो
ये हसीन चेहरा एक खिलता गुलाब सी लगती हो
किसी की जान न ले लेना आपकी मुसकान की तलवार से
हर मेहखाना का कभी न उतरने वाला शराब सी लगती हो
आप
Comments
3 responses to “आप”
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वाह
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वाह बहुत सुंदर
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Dhanyawad sirji
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