आराइश

उस आसमानी को मैं ज़मीनी बुला बैठा,
उसकी शिद्दत में मैं खुद को भुला बैठा,

आराईश में जिसकी मैं साँझ सवेरे बैठा,
उसकी मोहब्बत में मैं खुद को घुला बैठा,

मेरे जिस्म से मेरी रूह ने अलविदा कहा,
जो उसके बुलावे पे मैं खुद को सुला बैठा।।

राही अंजाना

Comments

3 responses to “आराइश”

  1. ज्योति कुमार Avatar
    ज्योति कुमार

    jay ho.
    kya bat hai

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