आ गया वसन्त (सोरठा छंद)

आ गया वसन्त आज, फिर पतंग हम उड़ाऐंगे।
कोकिलों की आवाज, मिल संग संग दोहराऐंगे।।

Comments

One response to “आ गया वसन्त (सोरठा छंद)”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

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