लोगों की जुबान का डर
नहीं रखना है,
बल्कि ईश्वर की सत्ता का
भान रखना है।
लोग गलत देखकर
गलत कहेंगे,
लेकिन ईश्वर गलत देखकर
माफ नहीं करेंगे।
थोड़ा सा ताकत पाने पर
गुमान नहीं करना है,
ईमान साथ रखना है
बेमान नहीं बनना है,
निरंकुश नहीं बनना है
ईश्वरीय सत्ता का
अंकुश समझना है,
उस सत्ता की नजर सर्वत्र है
इसे सचमुच समझना है।
ईमान साथ रखना है
Comments
3 responses to “ईमान साथ रखना है”
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बहुत सुन्दर रचना
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बहुत खूब
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ईश्वरीय सत्ता में विश्वास जगाती हुई कवि सतीश जी की अति उत्कृष्ट रचना, उम्दा लेखन
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