उनके जुमलों से आती है बूँ जलन की
हमने देखी है कुछ ताप उस अगन की
फाकामस्ती भी कोई जागीर से कम नहीं
लुत्फ़ उगते नहीं बदनसीबी है चमन की
राजेश’अरमान’
उनके जुमलों से

Comments
One response to “उनके जुमलों से”
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वाह बहुत सुंदर रचना
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