उसके जाने आने के

 उसके जाने  आने के दरम्यां  छुपी सदियाँ थी
  कुछ था पतझड़ सा  तो कुछ हरी वादियां थी

उसकी ख़ामोशी में दबी दबी सी बैठी थी
उसकी आँखों में कुछ बोलती चिंगारियां थी

 लिपटी है बदन से किसी पैरहन की तरह
 वो तेरी यादों की बस पुरवाइयाँ थी

कोई आहट नहीं मगर कुछ तो जरूर था
 तू न सहीं मगर तेरी परछाइयाँ थी

चाक जिगर के  कोई सिता भी कैसे
अपनी आँखों में कुछ ऐसी रुस्वाइयां थी
                          राजेश’अरमान’

Comments

3 responses to “उसके जाने आने के”

  1. Anjali Gupta Avatar

    Bahut khoob…very nice 🙂

  2. Abhishek kumar

    👌

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