उसके नजर मे आँसु का कोई मोल नही।
ए आँख! तु ऐसे ना आँसु ना वहा
ना कर किसी से गिला सिकवा।
यही था जीवन रास्ते राही की,
जिसको तु ने अपना समझा–
वो आसमान थी ,तु जमींन था ,फिर अब तुमको क्यो गम लगता ।
वो तो अपना कश्ती चलाती रही —-
मैने तो एहसास कर ही लिया।
कुछ यूँ हुआ मेरे साथ ना जबाब तु माँगी ना मौका दी सफाई का।
क्या नही कुछ मेरे पास तु तो हिसाब रखी मेरी औकादो का ।।
दुर जा रहा हूँ तेरे जहान से भी तेरा जहान तड़प जाएगा मेरा चीख से भी।।
दुर जा रहा हूँ—–
ज्योति
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