एक और मासूम की जिंदगी “रहस्य “देवरिया

एक और मासूम की जिन्दगी (“रहस्य”)
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दौलत की चाहने रिश्तों के धागे को तार तार कर दिया हैं,
एक और मासूम की जिन्दगी को मरने पर लाचार कर दिया हैं,,
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पापा सब दिया आपने इन्हें मेरी सूख खूशीओ की खातीर,
पर इन दहेज़ के लोभीओ ने मेरा जिना दूशवार कर दिया हैं,,
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और ना हो सको परेशान मेरी वजहा मेरी होठों की हॅशी के लिए,
माफ करना बाबा मुझे इसी लिए अपनी जान निसार कर दिया हैं,,
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दौलत की चाहने रिश्तों के धागे को तार तार कर दिया हैं,
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((((“रहस्य “))))((देवरिया))

Comments

2 responses to “एक और मासूम की जिंदगी “रहस्य “देवरिया”

  1. Abhishek kumar

    Good

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