एहसास

तेरी तस्वीर बनाने में जब भी जुट जाया करता हूँ,
खुद ब खुद ही जाना तुझसे जुड़ जाया करता हूँ,

रंगों की समझ रखता नहीं हूँ शायद यही सोचकर,
एहसासों का ही अंग तुझपे जड़ जाया करता हूँ,

पहचान नहीं कर पाती जब तुम अपनी खुद से,
चलाकर अपनी ही तुझसे अड़ जाया करता हूँ।।

राही अंजाना

Comments

4 responses to “एहसास”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    बहुत सुंदर रचना

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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