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कश्मकश

सूर्य उदित हुए
सुबह हुई
बड़ी ठंडी सी सुबह थी
सूरज ने भी कोहरे की
चादर ओढ़ रखी थी
वक्त का पता ही ना चला
कब सुबह हुई कब दिन ढ़ला
सुबह, दोपहर सांझ सब
एक सी हो गई
ज़िन्दगी भी यूं ही
कश्मकश में कहीं खो गई
_____✍️गीता

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