हर फैसले मेरे तेरे क़दमों में थे
तूने क़दमों का फ़ासला कर लिया
न हो दरम्यां सांसें भी अपनी लेकिन ,
तूने ज़ख्मों का काफिला चुन लिया
राजेश’अरमान’
काफिला
Comments
3 responses to “काफिला”
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Cool poem bro!
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न हो दरम्यां सांसें भी अपनी लेकिन …..nice
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मस्त
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