कुछ छुपा कर रखी थी यादें…

कुछ छुपा कर रखी थी यादें,
कुछ सपने भी संजोए थे ।
हम सपनों के करीब जाकर,
कुछ पल सिमट कर सोए थे।

Comments

10 responses to “कुछ छुपा कर रखी थी यादें…”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  3. Pratima chaudhary

    बहुत हार्दिक आभार

  4. Deep

    “जहाँ विश्वास हैं, वहीँ शक्ति हैं, वहीँ जित हैं ऑर वही आपके सपने पुरे होते हैं।”

    1. बहुत बहुत आभार

  5. बहुत उम्दा

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