कुछ बोलना होगा

समस्याएं बहुत हैं
आपको मुँह खोलना होगा
जरा बिंदास होकर
आज तो कुछ बोलना होगा।
गरीबी मिटाने के लगे
जितने भी नारे हैं,
उनको हकीकत में
हमें अब तोलना होगा।
बेरोजगारी से युवा
हैं दर्द में काफी,
हमारी लेखनी को
आज तो कुछ बोलना होगा।
न हमें पक्ष से प्यार
ना ही है विपक्षी से
यौवन का भला तो आज
हमने सोचना होगा।

Comments

2 responses to “कुछ बोलना होगा”

  1. Geeta kumari

    बेरोज़गारी हो या कोई और मुद्दा ,कवि की कलम नहीं बोलेगी तो और कौन बोलेगा। समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र में लिखती कवि सतीश जी की कलम से निकले बहुत ही सुन्दर उद्गार । बहुत उम्दा लेखन

Leave a Reply

New Report

Close