कुछ सोच रहा हूं मैं

कुछ सोच रहा हूं मैं,
कुछ खोज रहा हूं मैं।

जिंदगी के इन घने जंगलों में,
खुशी की कुछं टहनियां ढूंढ रहा हूं मैं।

वह हसीन वादियां कहीं खो सी गई हैं,
नदियों के किनारों का वह शोर थोड़ा थम सा गया है।
तेज हवाओं में उन पत्तियों का नाचना गाना
कहीं सो सा गया है,
बस उन्हीं के खुशी से झूमने का इंतजार कर रहा हूं मैं।।

जिंदगी की लंबी दौड़ में,
थोड़ा सा पीछे रह गया हूं।
संभलते संभलते कहीं खो सा गया हूं,
बस उसी खोए हुए खुद को कहीं ढूंढ रहा हूं।।

कुछ सोच रहा हूं मैं,
कुछ खोज रहा हूं मैं।।

Comments

6 responses to “कुछ सोच रहा हूं मैं”

  1. Chetan Pujara Avatar
    Chetan Pujara

    धन्यवाद

  2. Chetan Pujara Avatar
    Chetan Pujara

    Thank you

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