कुलदीपक

मेरे कुल का दीपक तुझसे छाया प्रकाश है
आया है तू जबसे आलोकित आकाश है ।
बहनों की तू आशा माता का लाल है
सबो की तू आशीष से चमका तेरा भाल है
सलामत रहें तू हम सबकी जान है
तुझसे दूर हम सबका जीना मुहाल है
करेगा कुल का नाम रौशन, हमें विश्वास है ।।
छल-प्रपंच से तू हमेशा बच के रहना
सत्य की जीत होगी, यह गाँठ बाँध लेना
खुद के बलबूते, तू हर कीर्तिमान रचना
मन्जिल दूर है, पर मुमकिन तलाश है ।।

Comments

4 responses to “कुलदीपक”

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद

  1. Geeta kumari

    बहुत सुन्दर

  2. बहुत अच्छी कविता

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