कोई तंग है, कोई हैरान है

कोई तंग है, कोई हैरान है
जिंदगी आज कुछ इस तरह से परेशान है

चेहरे हँस रहे है
फिर भी रौनक उनमें कम है
शायद मन ही मन वो बहुत उलझा सा
खुद में ही कहीं गुम है,

सपनों को पूरा करने के लिए वो हर सुबह निकलते हैं
दिन भर एक धुन में रहने के बाद
वो रात की नींद से लड़ते हैं

छोटे-छोटे बच्चों को खेलता देखता हूँ
तो सब भूल जाता हूँ
जीवन की इस दौड़ में भटक सा गया हूँ
बार-बार मैं मन को यही समझाता हूँ

बड़ी दौलत और शौहरत बना लेने के बाद भी
आज वो थोड़े से सुकून के लिए परेशान है,

कोई तंग है, कोई हैरान है
जिंदगी आज कुछ इस तरह से परेशान है

वो भटक सा गया है उसे रास्ता नहीं मिल रहा
आँखे खुली होने के बाद भी
उसे सिर्फ अँधियारा ही मिल रहा,

मेरे आशियाने में आज चंद लोग ही बचे हैं
सपने पूरे करते-करते आज वो अकेले ही खड़े हैं,

अज़ीब सी उलझन में है ये मन
की सब कुछ खो देने के बाद जो पाया
क्या वही है जीवन का अनमोल धन,

एक डर के साथ इस भीड़ में वो भी आगे बढ़ रहा है,
हालातों से लड़ने वाले क़िस्सों को सुन
वो भी आगे बढ़ रहा है,
सबसे आगे निकल जाने को
वो समझ रहा अपनी शान है

कोई तंग है, कोई हैरान
जिंदगी आज कुछ इस तरह से परेशान है।।

-मनीष

Comments

One response to “कोई तंग है, कोई हैरान है”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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