कोरोना महामारी आयी हाहाकार है दियो मचाय,
अंतर्मन चित्कार करें अब,कैसी दहशत दियो फैलाय,
ज़रा सी खांसी और जुकाम से,पल में अपने दूर हुइ जांय,
बुखार चढ़े ज्यों सौ से ऊपर,घर में क्वारंटाइन हुई जांय,
कोरोना महामारी आई हाहाकार है दियो मचाय,
घर की फुलवारी उजड़ गयी,सब गलियां सूनी हुई जांय,
हंसी ठिठोली अब ना सुनावे,सुनने को कान तरस है जाए
कोरोना महामारी पर आल्हा
Comments
9 responses to “कोरोना महामारी पर आल्हा”
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बहुत खूब
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धन्यवाद एकता जी
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Very nice
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Thank you
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बहुत सुंदर रचना
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धन्यवाद
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अतिसुंदर
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समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार
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कोरोना महामारी के कारण सचमुच संसार में हाहाकार हो गया है मार्मिक अभिव्यक्ति तथा आल्हा परंपरा में बहुत ही खूबसूरत अभिव्यंजना
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