ऐसे अपनो को क्यों सताता जा रहा है तू।
हर बार हमे क्यों रुलाता जा रहा है तू।।
“” “” “” “” “” “”
मेघो की आवाज सून ऐ काले बादल।
बिन बरसे आगे क्यों बढता जा रहा है तू।।
“” “” “” “” “” “”
जैसे की हमारे सपने हमारे अरमानो को।
इस कदर अब क्यों रौंदता जा रहा है तू।।
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तेरे तपन से हम हार कहा मानने वाले।
बेकसूर जमी को क्यों जलाता जा रहा है तू।।
“” “” “” “” “” “”
” रहस्य देवरिया “
क्यों रुलाता जा रहा है तू
Comments
5 responses to “क्यों रुलाता जा रहा है तू”
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Bahut sundar kavit
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Thanks
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सुंदर
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Thanks
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वाह बहुत सुंदर
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