ख़यालात

ख़यालातों के बदलने से भी,
नया दिन निकलता है।
सुनो, सिर्फ सूरज चमकने से,
ही सवेरा नहीं होता।
हां ठंड में थोड़ी धूप भी जरूरी है,
बादलों के आने से अंधेरा नहीं होता।।
____✍️गीता

Comments

4 responses to “ख़यालात”

    1. सादर आभार भाई जी🙏

  1. बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद ऋषि जी

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