ख़ामोशी की तह में,
छिपा कर रखते हैं हम,
अपने सारे ग़म।
क्योंकि कर के कोलाहल,
दिखाकर दुःख दर्द अपने
नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के।
पीना ही पड़ता है,
ख़ामोशी का हलाहल
ज़िन्दगी के कुछ उजालों के लिए ।।
_____✍️गीता
ख़ामोशी की तह में,
छिपा कर रखते हैं हम,
अपने सारे ग़म।
क्योंकि कर के कोलाहल,
दिखाकर दुःख दर्द अपने
नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के।
पीना ही पड़ता है,
ख़ामोशी का हलाहल
ज़िन्दगी के कुछ उजालों के लिए ।।
_____✍️गीता