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  1. पीना ही पड़ता है,
    ख़ामोशी का हलाहल
    ज़िन्दगी के कुछ उजालों के लिए,
    —- शानदार लेखनी, बहुत सुंदर भाव, अत्यंत गहराई लिए हुए भाव।

  2. ख़ामोशी की तह में,
    छिपा कर रखते हैं हम,
    अपने सारे ग़म।
    क्योंकि कर के कोलाहल,
    दिखाकर दुःख दर्द अपने
    नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के।
    पीना ही पड़ता है,
    ख़ामोशी का हलाहल
    ज़िन्दगी के कुछ उजालों के लिए ।।

    जीवन की सच्चाइयों को पेश करती हुई रचना

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