खामोश किसान

जवाब देने में हाज़िरजवाब बताये गए हम,
के अपने ही घर में खामोश कराये गए हम,

ज़िन्दगी बनाने को कितनी ही जगाये गए हम,
के अपनी ही चन्द सांसों से दूर कराये गये हम,

हर मौसम से क्यों सामने से भिड़ाये गये हम,
के सूखी धरती पे ही सूली पर चढ़ाये गए हम।।
राही (अंजाना)

Comments

7 responses to “खामोश किसान”

  1. Devesh Sakhare 'Dev' Avatar

    उत्तम प्रयास

  2. ashmita Avatar

    सराहनीय

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

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