खुदा मेरा भी अपना होता

Comments

2 responses to “खुदा मेरा भी अपना होता”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    मेरे देश के नेताओं का अजीब हाल हो गया,
    गरीबो के लिए लड़ते लड़ते वो मालामाल हो गया।
    चुनाव में हाथ जोड़कर घर घर जाता हैं,
    हर किया वादा निभाने की कसम खाता है।
    चुनाव जीतने पर वो खुशियां मनाता हैं,
    फिर सबको जाति धर्म के नाम पर लड़ाता है।
    किये गए सारे वादे वो पल में भूल जाता है,
    नेताजी का दर्शन भी दुर्लभ हो जाता है।
    हमारे देश मे पचपन का भी युवा नेता कहलाता है,
    देश का युवा पढ़ लिखकर भी
    बेरोजगार रह जाता है।
    अनपढ़ बन नेता अपना काम चलाता हैं,
    अधिकारियों पर भी खूब रौब जामाता हैं।
    दिन रात वो दौलत शोहरत कमाता है,
    पांच साल बाद उसे जनता का होश आता है।।

    अभिषेक शुक्ला “सीतापुर “

Leave a Reply

New Report

Close