ख्याल

अपने दिमाग के कुछ खयालों को उड़ जाने दिया,
मैंने अपने दिल को इस दिमाग से लड़ जाने दिया,

कश्मकश बहुत देर चली फिर हार कर बैठ गया,
मैंने अपने एहसासों को फिर यूँही मुड़ जाने दिया,

कहते ही रहे हर एक बात पर सब अपनी-अपनी,
मैंने सुना मगर खुद को ही खुद से जुड़ जाने दिया,

फर्क नज़र से नज़रिये के बीच मिटाने की खातिर,
मैंने ख्वाबों को ही खयालातों से भिड़ जाने दिया।।

राही अंजाना

Comments

2 responses to “ख्याल”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

Leave a Reply

New Report

Close