गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था

गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था,
तन्हाइयों में मेरा तुझसे अब मिलना बहोत जरुरी था !
मिटाने थे वो गिले सिकवे हुए हम दोनों के दरम्यान,
इस पत्थर से दिल का भी पिघलना बहोत जरुरी था !!

Comments

One response to “गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था”

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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