गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था,
तन्हाइयों में मेरा तुझसे अब मिलना बहोत जरुरी था !
मिटाने थे वो गिले सिकवे हुए हम दोनों के दरम्यान,
इस पत्थर से दिल का भी पिघलना बहोत जरुरी था !!
गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था
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One response to “गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था”
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सुन्दर रचना
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