होड़ा होड़ी आज सड़क पर ,
कुत्तों को दूध पिलाने की।
कचड़े खाती गाय बेचारी
हाय, कैसी सोच जमाने की ।।
राहु केतू के चक्कर में
क्यों लक्ष्मी को ठुकराते हो ।
दूध दही घी सुधा सरस
छोड़ सुरा क्यों अपनाते हो।।
गाय बेचारी
Comments
6 responses to “गाय बेचारी”
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Nice
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धन्यवाद
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दूध दही घी सुधा सरस
छोंड़ सुरा क्यों अपनाते हो
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति-
समीक्षा हेतु हार्दिक आभार
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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धन्यवाद
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