गुरुवार

सोई हुई चेतना को,
आप गुरुवार जाग्रत करदो

मन की इस मरुस्थल मैं,
स्नेह की बरसात करदो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Related Articles

वन डे मातरम

स्वतंत्र हैं हम देश सबका। आते इसमें हम सारे हर जाती हर तबका।।   सोई हुई ये देशभक्ति सिर्फ दो ही दिन क्यूँ होती खड़ी। एक…

“ धूप की नदी “

लड़की ; पड़ी है : पसरी निगाहों के मरुस्थल में ………….धूप की नदी सी । लड़की का निर्वस्त्र शरीर सोने—सा चमकता है लोलुप निगाहों में…

Responses

New Report

Close