Vinita Shrivastava, Author at Saavan's Posts

बलिदान

लाल लाल है रक्त उनका लाल लाल मैदान है याद रखना देशवासी जिसने दिया बलिदान है स्वार्थ नहीं था कुछ इनका ना ही कुछ अरमान थे भारत माता ,भारतवासी इन पर ये कुर्बान थे थे साहसी वीर बाँकुरे भारत का अभिमान है याद रखना देशवासी जिसने दिया बलिदान है –विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)– »

प्रगति

मत डरो विपदाओं से समझो प्रभु का वास है विपत्ति में भी दिया है देखो प्रगति का पावन राज है »

शयम

बरस रहा है पतझड़ हम पर टूट रहे हैं पल्लव आजाओ अब शीघ्र श्याम बनकर तुम बहार नव »

सांसारिक सुख

ये सांसारिक सुख मैं क्या रखा है एक नज़र सेवा करके देखो »

वतन

तू देश का अनमोल रतन है बचा के रख इसे ये तेरा वतन है »

अवतार

जब जब पड़ा धरा पर , दानवों का भार तब तब आ गए तुम, लेकर ये अवतार मिटा दिया भू से, तुमने अनाचार »

त्याग

त्याग है एक सम्मान रहे हमेशा इसका मान »

सुख

वो मनुज ही सफल है जिसने जीवन में सेवा सुख दिया है »

जीवन एक परीक्षा है

जीवन एक परीक्षा है जिसमे सेवा व धैर्य की साधना करनी होगी »

देश

देश हमारा फले फूले सजा रहे ये संसार वक़्त है अभी बचा लो इसे खो जाये ये कहीं »

प्रकृति

घिरी हैं प्रकृति में, आनंद की घटाएं , हृदयस्पर्शी हैं, यहाँ की हवाएं, जी करता है , इन्ही में समां जाएं »

ये धरा

गगनचुम्बी चोटियां , ये नीला अम्बर है, हिमालय नभ मिल हुए, खेत श्याम रंग है, हिमालय का सौंदर्य , अति अनुपम है »

ईश्वर

ईश्वर ने किया प्रकृति का श्रृंगार उसने दिया हमें ये अनमोल उपहार -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

मनुजता

ऐ मनुज जिस दिवस , मनुजतत्व पाओगे स्वयं को पा लोगे , जग को अपनत्व दे जाओगे »

खो न जाना

आधुनिक है ये दुनिया खो न जाना तू इसमें माता पिता एक मोती हैं खो न देना एक पल में »

सतपथ

जाग नर कीमती है तेरा, छन छन तेरा चल पड़ा सतपथ पर अब, रुकना नहीं है काम तेरा »

विलक्षण

विलक्षण हैं उसके नियम, नहीं पता नीति उसकी क्या है आये हैं हम कहाँ से, जाना हमें कहाँ है »

मानव

मानव तू आया है जिस हेतु जग में बांध ले तू प्रेम दया का,सेतु जग में »

मृत्यु

मृत्युपथ पर जा रहा, वर्षा दो अमियासुधा रख कर निज नरेतित्व में , माँ रक्षा करो रक्षा करो »

उत्साह

मैं निरुत्साहित हूँ, उत्साह बनकर आओ मैं असमर्थ, समर्थ बनकर आओ »

सबका ज़िक्र है

वो है तेरे साथ ओ बन्दे, फिर किसकी फ़िक्र है जनता है वो तुझे उसपे सबका ज़िक्र है »

लक्ष्य

हो अटल तेरा लक्ष्य की कभी न डगमगा सके »

राहें

सुलगती हुई राहों में ,मेधवान बरसा करो प्रनतपालिनी माता तुम, रक्षा करो रक्षा करो »

प्यार का मोह है

प्यार का मोह है इस दुनिया में अर्थ न कोई जनता माता पिता को छोड़ दिया तूने, मोह के पीछे भागता »

आधुनिक है ये दुनिया

आधुनिक है ये दुनिया खो न जाना तू इसमें माता पिता एक मोती हैं खो न देना एक पल में »

सच्ची सीख

पतितों का उत्थान हो माँ , सत्मार्ग दिखा, देकर सद्बुद्धि माँ , सच्चाई की रीत सीखा »

गरीब भूका सो रहा

गरीब भूका सो रहा, अमीर भी है रो रहा तो फिर सच्चा सुख कहाँ वो है हरी चरणों में »

अज्ञानी

मैं अज्ञानी आत्मा हूँ, मुझको लख्या देदो एक सहारा है तुम्हारा एक बार दरस देदो »

परिवर्तन

कर दे परिवर्तन, ऐ तांडव निरतन न हो अब क्रांति, शांति शांति बस शांति »

संभल

देखो निर्मित हो रही हैं अवगुणो की ये सुरंग संभल जा ऐ मानव यही है वक़्त »

अवगुण

देखो निर्मित हो रही है, अवगुणो की ये सुरंग वैभव में मैं रम गया, माया का छह है रंग »

कल्पनाएं

संग्राम मय जीवन में आएं बहुत विपदाएं परोपकर के लिए हो मेरी हर एक कल्पनाएं »

नीराधा जीवन

निराधा इस जीवन को, आज तुम आधा दे दो इस हृदय के मरुपथ को, आज शीतल धरा दे दो »

ये जीवन

एक भरोसा तेरा है, भूल न जाना सांवरिया देर करो न तुम हरी ये जीवन अकेला है »

कांटें भी फूल

साथ जो मेरे तुम हो हरी, तो कांटें भी फूल बनें »

परोपकार

परोपकार के लिए हो, अब मेरी कल्पनाएं व्यर्थ ही भटक रहे, चरणों में अब दो विश्राम »

सीप

त्रिलोक का अलोक जो, तुम वो महादीप हो संसार के सागर में, तुम ही एक सीप हो »

हर्ष

ऐ हिमालय ऐ धरा , यूहीं मुस्कुराते रहें न हो क्रंदन स्वर, सभी उर हर्षाते रहें बस छह इतनी , देशहित शहीद होते रहें »

हर्ष

ऐ हिमालय ऐ धरा , यूहीं मुस्कुराते रहें न हो क्रंदन स्वर, सभी उर हर्षाते रहें बस छह इतनी , देशहित शहीद होते रहें »

भटक रहा हूँ

आँधियों से लड़ने में, मैं तो रहा असमर्थ लक्ष्य मिला नहीं मुझे, भटक रहा हूँ व्यर्थ »

समर्थ

हे समर्थ संग चलो, पथ में तुम न छोडो बनकर डीप चलो, तिमिर में न छोडो »

माया

अब तो अलोक दो , मनुजता दुखित हो रही मदमोहमाया से मेरी माँ, रक्षा करो, रक्षा करो »

माटी

माटी की ये जीर्ण काया, उस पर ग्रसित मोह माया »

माया

अब तो अलोक दो , मनुजता दुखित हो रही मदमोहमाया से मेरी माँ, रक्षा करो, रक्षा करो »

पूर्ण है विश्वास

पूर्ण है विश्वास मुझे, इस दिवस तुम आओगे »

माँ

पथ दिखाके,लक्ष्य दिखती’ है पथ प्रदर्शक माँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

जीवन के ये रस्ते

काँटों से भरे हुए है, जीवन के ये रस्ते, घाव मिलते पग पग पर लक्ष्य से हैं भागते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

सांझ दिवस

सांझ दिवस और रैन में, बीएस तुमको ही पुकारा है सृष्टि के कण कण में, तुमको ही पुकारा है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

वीर सपूत

सत्य और आदर्श से, कालिमा चीर दो बाद चलो वीर सपूत, धरती के तुम वीर हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

मति

लाख मिले जो तुम्हे प्रलोभन, हो स्थिर मन,स्थिर मति तेरी »

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