हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

5 Comments

  1. तालीम लेता है इंसा तरक्की की खातिर लेकिन
    खुद को खोना मगर किताबों ने नहीं सिखाया है… bahut khoob

  2. अपनी मिटटी ,अपनी फ़िज़ाओं पे ऐतबार तो कर
    अपने वास्ते भी ख़ुदा ने सब कुछ वहां बनाया है …………… Subhan Allah

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