गोरैया चिड़िया

सुबह सुबह घर के आँगन में वो फुदक फुदक इठलाती थी,

गोरैया चिड़िया जब अक्सर हमसे मिलने आती थी,

विलुप्त हो रही है जो पंछी वो चूँ चूँ करके गाती थी,

छोटे छोटे बच्चों को भी वो मन ही मन में भाती थी,

बड़ी सरलता से जो घर की छत पर हमको दिख जाती थी,

अब इंटरनेट के पन्नों पर वो ढूंढे से मिल पाती है।।
राही (अंजाना)

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