अश्क ने नैनों से बहकर
होंठ पर संगम किया
पत्थरों ने बिन कहे ही
प्रेम का वर्णन किया।
ताप बढ़ता ही गया जब
कक्ष के भीतर हृदय के
आपने मुस्कान देकर
ताप में चंदन दिया।
चंदन दिया
Comments
3 responses to “चंदन दिया”
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बहुत ही सुरम्य गीत का सृजन हुआ है कवि सतीश जी की लेखनी से.. सुंदर भाव और सुन्दर शिल्प सहित अति सुन्दर रचना
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Waw waw…
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वाह कवि महोदय
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