चुप्पियाँ कहती हैं कितना बोलता हूँ मैं,
सपने कहते है कितना जागता हूँ मैं,
रास्ते कहते हैं कितना ठहरता हूँ मैं,
लम्हें कहते हैं कितना सिमटता हूँ मैं,
चादर कहती है कितना लिपटता हूँ मैं,
हथेली कहती है कितना बटोरता हूँ मैं,
मन कहता है कितना सुनता हूँ मैं,
समय कहता है कितना बदलता हूँ मैं॥
#राही(अंजाना)
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