जब आई थी सजधज कर तुमसे मिलने
लिये हाथों में गुलाब का फूल
कोई हसरत थी मन में प्यार की
जब कोई कमेंट ना किया तुमने
जाने लगी थी भारीमन से गिला लेकर
पलटकर देखा तुम्हारा मुझे ताकना
मेरे गिले – शिकवे मोहब्बत मे तब्दील हो गये
जब आई थी सजधज कर तुमसे मिलने
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One response to “जब आई थी सजधज कर तुमसे मिलने”
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NIce
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